Monday, 11 May 2015

हरी ओम ......आज पासून पुन्हा ब्लॉग वर रे खा ट णे सुरु जसे जमेल तसे ,,,, विशेष आभार शरद मणी, विलास भागवत, धीरज बोरीकर , नरेंद्र-तृप्ती, संजय जोशी, संजय पाचपोर, स्मिता, अहमद

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‪#‎आगरा‬।।। ‪#‎ताज‬ महल देखा। । दुनियाकी नजरोंका एक नूर मगर ‪#‎हिन्दुस्थान‬ की इतिहास के पन्नेपर विवादित वास्तु। । ‪#‎शहजान‬ की कला के साथ क्रूरता की भी दास्ताँ। ताज महल से तेजो मंदिर तक की सुनी सुनाई बाते।।। वाह से आगरा फोर्ट जाना ही था । ‪#‎छत्रपति‬ शिवजी की भूमि से आगरा में फोर्ट के सामने जब छत्रपति का पुतला देखा तो सर ऊँचा हुवा। दौड़ते जब दीवाने खास में गए और जहाँ ४०० साल पहले हिन्द केसरीने दिल्ली के सल्तन के सामने अपने स्वाभिमान का परिचय दिया था । छत्रपतिसे पराभूत हुए सरदारोंके के पीछे खड़े रहना डंके की चोट पर मन कर दिया था। . खुले आम दिल्ली के वजीरे आलम क्रूर औरंगजेब को उशिके भूमि में उशी के जनम दिन पर ललकारा था । और उसके षड्यंत्री मन को उजागर करने का अवसर प्रधान किया था. और अपनी संग़ठन कुशलता और अपूर्व धैर्य और सहस का परिचय देते हुवे। . आगरा से हिन्द के गनिमि सूत्र का परिचय देते हुए सहीसलामत निकल आये थे।
मगर हमे क्या पता यह इतिहास। । आजादी के बाद आगरा उस दीवाने खास में दिवार पर सरकारी आदेशानुसार लिखा है । की जब हिन्दुस्थान का शहेंशा औरंगजेब का जन्मदिन मनाया जा रहा था तब एक मराठा सरदार शिवाजी आया था मगर कड़क धुप के कारन उन्हें दरबार में मूर्छित होना पड़ा
झूठ त्रिवार झूठ..