Tuesday, 10 April 2018

जाहीर निमंत्रण एका पुनर्निमित कलेचे


काही अनुभवी...

काही नवीन कलाकारांच्या संचात...


कुशल मार्गदर्शक नट व कसदार दिग्दर्शक प्रमोद पवार यांच्या तालमीत साकार झालेले...


कलेचे उपासक म्हणून परिचित गिरगावातील साहित्य संघ मंदिराचे

निर्मिती मूल्य लाभलेले....

आणि  

स्वातंत्र्यवीर सावरकरांच्या अभिजात लेखणीतून सद्यस्थितीवर कोरलेले कालसुसंगत ऐतिहासिक संगीत महानाट्य 

संन्यस्त खड्ग 

म्हणजे 

दोन मनाचा... 

दोन व्यक्तित्वाचा.... 

दोन विचार धारेचा....

परस्पर संघर्ष नसून 

कालसापेक्ष 

चिरंतन भारतीय तत्त्वज्ञानाचा 

एकसंघ विचारांचा

आणि या मातीतील एकरूप हुंकाराचा एक कलाविष्कार.....


शुभारंभ प्रयोग 

दिनांक 12 एप्रिल 2018 

सायंकाळी 6.30वाजता

साहित्य संघ मंदिर, गिरगाव  


कलाकृतीला प्रोत्साहित करण्यासाठी जुन्या बरोबरीनेच वर्तमान वस्तुस्थितीशी ही बावनकशी ठरलेल्या विचारांचे सोने लुटण्यासाठी सर्वांना विनामूल्य प्रवेश आहे...



मी शरद चव्हाण 
आपणास विशेष निमंत्रित करतो आहे कारण या नाटकात प्रमुख भूमिकेत माझा मोठा भाऊ भरत चव्हाण काम करत आहे 
ज्यानी प्र ल मयेकर लिखित तक्षक याग नाटकात ही अविनाश नारकर, शरद पोंक्षे यांच्या सोबत भूमिका केली होती .
                     
 दुसरे कारण म्हणजे गायक नटाच्या प्रमुख भूमिकेत  संगीत रत्न मित्र अमोल बावडेकर जो माझा जिवलग मित्र होता त्या कै.शैलेश बावडेकर चा लहान भाऊ आहे.  

 आणि तिसरे प्रयोजन म्हणजे मी संघाचा स्वयंसेवक आहे आणि आनंद आणि अभिमान आहे या नाटकाचे दिग्दर्शक ही एक स्वयंसेवकच जे संघ विचारधारेतील संस्था संस्कार भारती padadhikari v ज्येष्ठ रंगकर्मी shri प्रमोद पवार करत आहेत .


 

Sunday, 1 April 2018

3rd eYe

कशा साठी बाळासाठी ।

स्कूल में  हिरकणी नामक एक जुझारू वीर माता की कहानि पढी थी ।

छत्रपती शिवाजी महाराज के समय की इस कहानी में किले के दरवाजे शाम के समय नियम तहत बंद होने के बाद सबेरे दूध विक्री हेतु आयी हुई यह हिरकणी नामक महिला किले में फस जाती है ।

घर में पिछे छोड आये अपने शिशु  के पास लौटना अपनी मजबुरी एवं अत्यंत आवश्यकता है इस ममता भरी पुकार के बाद भी नियम से बंध्ये पहरेदार उसे बाहर जाने की अनुमती नही दे पाते है ।

कल सुबह तक द्वार न खोलने की असमर्थता प्रकट करते हुये वे अपने पहरेदारी में जुट जाते है।

अब एक माँ ने भी मन ही मन ठान लिया आज की रात बच्चा सोयेगा तो उसकी गोद में ही वो भी लोरी सुनते सुनते ।

अपने लाडले बच्चे को मिलने हेतु बेचेन माँ की कोमल ममता अब दृढ संकल्प में बदल जाती है ।

बच्चे को मिलने की लगन ने डर को जीत लिया फिर घने अंधेरे में ऊस रात ने पलभर में दिन दहाडे अनेकों को मृत्य से मुलखात करने वाले मौत की खाई से परिचित उस चट्टान को भी परास्त होते हुये देखा ।

अपने घर जब हिरकणी पहूँची तो मानो कालचक्र पर यह अंकित हुवा की संकट के घडी में बाळासाठी  निर्भयता, अनुपम धैर्य और अतुलनीय साहस ही माँ का संपूर्ण रूप होता है ।

इसी का पुनः उदाहरण मुंबई ने 22 मार्च 2017 को अनुभव किया ।

वैसे मुंबई के आरे कोलोनी , फिल्म सिटी यह आज भी घने जंगल से बसा हुवा क्षेत्र है ।

गिना चुना जनजाति समाज बरसो इस क्षेत्र में बसा हुवा है । प्रकृती की गोद में आज भी गुजराण करते हुये इर्द गिरद सिमेंट के जंगल से प्रभावित हो रहा है ।

मगर रोजी रोटी की चक्कर में परिस्थिती से झुजते हुये जीवन ग्यापित कर रहे है ।

हाल ही में विश्व पटल पर नगरिय जीवन बस्ती से सटीक एवं खुलेआम जुडे हुये खतरनाक तेंडुओ में इसी नॅशनल पार्क क्षेत्र की फोटो एवं विडिओ चर्चा का विषय बनी थी ।

माँ की गोद में लेटे हुये सूअर के  बच्चे को दबोचकर इमारत की सुरक्षा दिवार से भागता हुवा  तेंडुआ भी बहुत लोगो ने देखा होगा ।

सौ प्रमिला वासुदेव रिंजड उस रात 9 बजे अंधेरे में अपने आंगण में बैठी ही थी पिछे अपने 3 साल बच्चे प्रणय की आहट सुनी और उसकी तरफ देखते ही देखते रह गयी ।।।। सामने का दृश्य अति भयावह , दर्दनाक था ।  उसके सामने ही दौडकर एक तेंदूये ने
पल भर  में बेटे पर आक्रमण कर दिया था।

शेर उसे पुरी तरह से दबोच ले इसके पहले ही पुरी ताकत से माँ प्रमिला ने शेर पर हल्ला बोल दिया शोर और आकस्मिक प्रहार के कारण शेर को प्रणय को छोडकर दुमदबाकर भागना पडा ।
सदर घटना जोगेश्वरी येथील चाफेच्या पाडयावर घडली ।

पुन्हा एकदा बाळासाठी काहीही साहस  करायला आई सदैव तत्पर  असते हेच सिध्द झाले ।

त्या वीर मातेला प्रत्यक्ष भेटून वंदन करण्याचे भाग्य मला सर्वश्री रमेश म्हात्रे, जयंत कंदारकर आणि पंकज पाठक मुळे प्राप्त झाले । स्थानिक श्री बाळकृष्ण मालुंजकर यांचे साहाय्य लाभले ।