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कशा साठी बाळासाठी ।
स्कूल में हिरकणी नामक एक जुझारू वीर माता की कहानि पढी थी ।
छत्रपती शिवाजी महाराज के समय की इस कहानी में किले के दरवाजे शाम के समय नियम तहत बंद होने के बाद सबेरे दूध विक्री हेतु आयी हुई यह हिरकणी नामक महिला किले में फस जाती है ।
घर में पिछे छोड आये अपने शिशु के पास लौटना अपनी मजबुरी एवं अत्यंत आवश्यकता है इस ममता भरी पुकार के बाद भी नियम से बंध्ये पहरेदार उसे बाहर जाने की अनुमती नही दे पाते है ।
कल सुबह तक द्वार न खोलने की असमर्थता प्रकट करते हुये वे अपने पहरेदारी में जुट जाते है।
अब एक माँ ने भी मन ही मन ठान लिया आज की रात बच्चा सोयेगा तो उसकी गोद में ही वो भी लोरी सुनते सुनते ।
अपने लाडले बच्चे को मिलने हेतु बेचेन माँ की कोमल ममता अब दृढ संकल्प में बदल जाती है ।
बच्चे को मिलने की लगन ने डर को जीत लिया फिर घने अंधेरे में ऊस रात ने पलभर में दिन दहाडे अनेकों को मृत्य से मुलखात करने वाले मौत की खाई से परिचित उस चट्टान को भी परास्त होते हुये देखा ।
अपने घर जब हिरकणी पहूँची तो मानो कालचक्र पर यह अंकित हुवा की संकट के घडी में बाळासाठी निर्भयता, अनुपम धैर्य और अतुलनीय साहस ही माँ का संपूर्ण रूप होता है ।
इसी का पुनः उदाहरण मुंबई ने 22 मार्च 2017 को अनुभव किया ।
वैसे मुंबई के आरे कोलोनी , फिल्म सिटी यह आज भी घने जंगल से बसा हुवा क्षेत्र है ।
गिना चुना जनजाति समाज बरसो इस क्षेत्र में बसा हुवा है । प्रकृती की गोद में आज भी गुजराण करते हुये इर्द गिरद सिमेंट के जंगल से प्रभावित हो रहा है ।
मगर रोजी रोटी की चक्कर में परिस्थिती से झुजते हुये जीवन ग्यापित कर रहे है ।
हाल ही में विश्व पटल पर नगरिय जीवन बस्ती से सटीक एवं खुलेआम जुडे हुये खतरनाक तेंडुओ में इसी नॅशनल पार्क क्षेत्र की फोटो एवं विडिओ चर्चा का विषय बनी थी ।
माँ की गोद में लेटे हुये सूअर के बच्चे को दबोचकर इमारत की सुरक्षा दिवार से भागता हुवा तेंडुआ भी बहुत लोगो ने देखा होगा ।
सौ प्रमिला वासुदेव रिंजड उस रात 9 बजे अंधेरे में अपने आंगण में बैठी ही थी पिछे अपने 3 साल बच्चे प्रणय की आहट सुनी और उसकी तरफ देखते ही देखते रह गयी ।।।। सामने का दृश्य अति भयावह , दर्दनाक था । उसके सामने ही दौडकर एक तेंदूये ने
पल भर में बेटे पर आक्रमण कर दिया था।
शेर उसे पुरी तरह से दबोच ले इसके पहले ही पुरी ताकत से माँ प्रमिला ने शेर पर हल्ला बोल दिया शोर और आकस्मिक प्रहार के कारण शेर को प्रणय को छोडकर दुमदबाकर भागना पडा ।
सदर घटना जोगेश्वरी येथील चाफेच्या पाडयावर घडली ।
पुन्हा एकदा बाळासाठी काहीही साहस करायला आई सदैव तत्पर असते हेच सिध्द झाले ।
त्या वीर मातेला प्रत्यक्ष भेटून वंदन करण्याचे भाग्य मला सर्वश्री रमेश म्हात्रे, जयंत कंदारकर आणि पंकज पाठक मुळे प्राप्त झाले । स्थानिक श्री बाळकृष्ण मालुंजकर यांचे साहाय्य लाभले ।
कशा साठी बाळासाठी ।
स्कूल में हिरकणी नामक एक जुझारू वीर माता की कहानि पढी थी ।
छत्रपती शिवाजी महाराज के समय की इस कहानी में किले के दरवाजे शाम के समय नियम तहत बंद होने के बाद सबेरे दूध विक्री हेतु आयी हुई यह हिरकणी नामक महिला किले में फस जाती है ।
घर में पिछे छोड आये अपने शिशु के पास लौटना अपनी मजबुरी एवं अत्यंत आवश्यकता है इस ममता भरी पुकार के बाद भी नियम से बंध्ये पहरेदार उसे बाहर जाने की अनुमती नही दे पाते है ।
कल सुबह तक द्वार न खोलने की असमर्थता प्रकट करते हुये वे अपने पहरेदारी में जुट जाते है।
अब एक माँ ने भी मन ही मन ठान लिया आज की रात बच्चा सोयेगा तो उसकी गोद में ही वो भी लोरी सुनते सुनते ।
अपने लाडले बच्चे को मिलने हेतु बेचेन माँ की कोमल ममता अब दृढ संकल्प में बदल जाती है ।
बच्चे को मिलने की लगन ने डर को जीत लिया फिर घने अंधेरे में ऊस रात ने पलभर में दिन दहाडे अनेकों को मृत्य से मुलखात करने वाले मौत की खाई से परिचित उस चट्टान को भी परास्त होते हुये देखा ।
अपने घर जब हिरकणी पहूँची तो मानो कालचक्र पर यह अंकित हुवा की संकट के घडी में बाळासाठी निर्भयता, अनुपम धैर्य और अतुलनीय साहस ही माँ का संपूर्ण रूप होता है ।
इसी का पुनः उदाहरण मुंबई ने 22 मार्च 2017 को अनुभव किया ।
वैसे मुंबई के आरे कोलोनी , फिल्म सिटी यह आज भी घने जंगल से बसा हुवा क्षेत्र है ।
गिना चुना जनजाति समाज बरसो इस क्षेत्र में बसा हुवा है । प्रकृती की गोद में आज भी गुजराण करते हुये इर्द गिरद सिमेंट के जंगल से प्रभावित हो रहा है ।
मगर रोजी रोटी की चक्कर में परिस्थिती से झुजते हुये जीवन ग्यापित कर रहे है ।
हाल ही में विश्व पटल पर नगरिय जीवन बस्ती से सटीक एवं खुलेआम जुडे हुये खतरनाक तेंडुओ में इसी नॅशनल पार्क क्षेत्र की फोटो एवं विडिओ चर्चा का विषय बनी थी ।
माँ की गोद में लेटे हुये सूअर के बच्चे को दबोचकर इमारत की सुरक्षा दिवार से भागता हुवा तेंडुआ भी बहुत लोगो ने देखा होगा ।
सौ प्रमिला वासुदेव रिंजड उस रात 9 बजे अंधेरे में अपने आंगण में बैठी ही थी पिछे अपने 3 साल बच्चे प्रणय की आहट सुनी और उसकी तरफ देखते ही देखते रह गयी ।।।। सामने का दृश्य अति भयावह , दर्दनाक था । उसके सामने ही दौडकर एक तेंदूये ने
पल भर में बेटे पर आक्रमण कर दिया था।
शेर उसे पुरी तरह से दबोच ले इसके पहले ही पुरी ताकत से माँ प्रमिला ने शेर पर हल्ला बोल दिया शोर और आकस्मिक प्रहार के कारण शेर को प्रणय को छोडकर दुमदबाकर भागना पडा ।
सदर घटना जोगेश्वरी येथील चाफेच्या पाडयावर घडली ।
पुन्हा एकदा बाळासाठी काहीही साहस करायला आई सदैव तत्पर असते हेच सिध्द झाले ।
त्या वीर मातेला प्रत्यक्ष भेटून वंदन करण्याचे भाग्य मला सर्वश्री रमेश म्हात्रे, जयंत कंदारकर आणि पंकज पाठक मुळे प्राप्त झाले । स्थानिक श्री बाळकृष्ण मालुंजकर यांचे साहाय्य लाभले ।
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